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shivamdixit


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“योग के विरोध का रोग”

Posted On: 17 Jun, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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आप में “अस्त्र-शास्त्र”!

Posted On: 2 Apr, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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अब की बार “संभलके” सरकार !

Posted On: 2 Mar, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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“एक युद्ध विश्वकप का”!

Posted On: 10 Feb, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नसीब – बदनसीब !!!

Posted On: 2 Feb, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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“मोदी की अग्निपरीक्षा” !!!!

Posted On: 1 Feb, 2015  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

केजरीवाल कह रहें हैं की उन्होंने "आप " को अपने खून पसीने से सींच कर बनाया है और यह पार्टी अब जनता की पार्टी न रहकर उनकी बपौती पार्टी हो गयी है ,उनसे कोई पूछे अगर जनता का समर्थन ना मिला होता अगर देश और दिल्ली की जनता ने अपना कीमती समय और खून पसीना न बहाया होता तो क्या अकेले ये अपने दम पे पार्टी बना लेते और चुनाव जीत जाते, अरे ! मैंने भी आम आदमी पार्टी के लिए काम किया है मैं एक बुजुर्ग होते हुए भी "आप " पार्टी के लिए काम किया है अतः अरविन्द का यह कह देना की केवल उन्होंने अपने खून पसीने इस पार्टी को खड़ा किया है सरासर गलत है जब उन्होंने योगेन्द्र यादव जैसे सीनियर समाजसेवी एवं प्रशांत भूषण जैसे कानूनविद अनुभवी वकील को दर किनार किया, पार्टी से निकाल दिया क्या इन दोनों को पार्टी से निकालने के पहले उन्होंने दिल्ली की जनता से पूछा .यही केजरीवाल एक साल पहले तक चिल्ला - चिल्ला के कह रहे थे वे कोई फैसला जनता से पूछ कर करते है फिर इन दो अनुभवी नेताओं को पार्टी से निकालने के पहले अरविन्द को जनता की याद क्यों नहीं आई ?. शायद अरविन्द भूल रहें हैं अरविन्द ने ही शपथ ग्रहण के रोज रामलीला मैदान में अपने विधायकों को कहा था अभिमान नहीं करना है और सच भी है जब रावण का अभिमान नहीं रहा फिर अरविन्द को कितने दिन हुए राजनीती में जन्म लिए . अच्छा होता अरविन्द अपने इन गलत फैसलों पर पुनर्विचार करते और पार्टी को मजबूत बनाने का प्रयास करते आपने अच्छा आलेख लिखा है मैं अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाया और इतना कुछ लिख डाला anytha नहीं lenge

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey




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